निरामय आरोग्य संस्थान का कार्य सिर्फ स्कूल चलाने या किताबें बांटने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों और युवाओं को गरिमापूर्ण जीवन की मुख्यधारा में जोड़ना है।
बंद व परित्यक्त सरकारी भवनों का जीर्णोद्धार। प्रारंभिक शिक्षण स्थानीय भाषा (गोंडी एवं हलबी) में, इसके बाद हिंदी, संस्कृत, सामान्य विषय, नैतिक शिक्षा तथा स्मार्ट टीवी व वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा आधुनिक डिजिटल शिक्षण।
'नियद नेल्ला नार' स्वास्थ्य अभियान के तहत नारायणपुर, बीजापुर व सुकमा के कटे हुए क्षेत्रों में उफनती नदियों व घने जंगलों को पार कर विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं। आपात स्थिति हेतु 1 समर्पित एम्बुलेंस तथा सुरक्षा बलों के साथ समन्वय।
महिलाओं हेतु सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण (कोलिंग, जिरामतरई, दरभा), स्थानीय युवाओं हेतु अग्निवीर/बस्तर फाइटर प्रशिक्षण (कुआकोंडा), कंप्यूटर साक्षरता, तथा छत्तीसगढ़ औषधीय पादप बोर्ड के साथ हर्बल व वनोपज प्रसंस्करण इकाइयाँ (इतपाल)।
बस्तर संभाग और अबूझमाड़ के दुर्गम अंचलों में संचालित संस्था के प्रमुख केंद्र
नारायणपुर जिला मुख्यालय में स्थित हमारा सबसे मुख्य केंद्र, जो विशेष रूप से नक्सल पीड़ित बालिकाओं के लिए पूर्ण आवासीय कन्या विद्यालय (छात्रावास) है। यहाँ परिवार जैसा माहौल, सुरक्षा, पोषण व डिजिटल शिक्षा उपलब्ध है।
सामुदायिक सहयोग से संचालित आदर्श विद्यालय। जहाँ बच्चों ने कभी बिजली का बल्ब नहीं देखा था, वहाँ आज स्मार्ट टीवी, यूट्यूब व वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से वे देश-दुनिया के विज्ञान व नक्शों को सीख रहे हैं।
अबूझमाड़ का वह हृदय स्थल जहाँ पहुँचना भी एक बड़ी चुनौती है। विपरीत परिस्थितियों में परित्यक्त भवनों का पुनरुद्धार कर स्थानीय शिक्षकों की नियुक्ति और निरंतर रसद आपूर्ति से शिक्षा का दीप जल रहा है।
कोलिंग, जिरामतरई और दरभा में महिलाओं व युवतियों के लिए सिलाई प्रशिक्षण। हुनर सीखकर माताएं व बहनें सम्मानपूर्वक अपनी आजीविका कमा रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं।
कुआकोंडा केंद्र में 60 से अधिक स्थानीय युवाओं को शारीरिक एवं मानसिक रूप से तैयार किया जा रहा है, ताकि वे सुरक्षा बलों में शामिल होकर देश व अपने क्षेत्र की गौरवपूर्ण सेवा कर सकें।
नारायणपुर, बीजापुर और सुकमा के दूरस्थ गांवों में उफनती नदियों और घने जंगलों को पार कर विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं। छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और CRPF, ITBP, BSF का समन्वित प्रयास।
नक्सलवाद ने कई जिंदगियां बर्बाद की हैं, लेकिन निरामय आरोग्य संस्थान के संरक्षण में इन बच्चों ने नई उम्मीद और उड़ान पाई है।
"जब गाँव में गोलियां चलीं, तो हमने जंगल में शरण ली। निरामय आरोग्य संस्थान ने हमें न केवल सिर पर छत दी, बल्कि भविष्य के सपने देखना भी सिखाया।"
संघर्ष: नक्सली हिंसा में माता-पिता को खोने के बाद दोनों बच्चियां एकाकी थीं।
बदलाव: आज बखरूपाड़ा में पढ़ाई कर रही हैं और बड़ी होकर नर्स बनना चाहती हैं।
"जिन्होंने कभी बिजली का बल्ब तक नहीं देखा था, वे पहली बार स्कूल आईं तो हर नई वस्तु से डरती थीं।"
नवाचार: आज वे स्मार्ट टीवी पर विज्ञान और भूगोल के वीडियो देखती हैं।
असर: डिजिटल साक्षरता ने डर खत्म कर दिया, अब वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सवाल पूछती हैं।
"शोषण, सामाजिक दंश और हिंसा के चंगुल से निकलकर आज स्वावलंबन और शिक्षा की राह पर।"
संघर्ष: नक्सली हत्या और चरवाहे के तौर पर शोषण का सामना किया।
बदलाव: आज संस्था के संरक्षण में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी कर रही हैं।
जंगल के भीतर सुचारु संचालन हेतु संस्था के समर्पित संसाधन
आपातकालीन स्थितियों के लिए हमारे पास अपनी 1 समर्पित एम्बुलेंस की सुविधा है, जो बस्तर के घने जंगलों के भीतर जीवनदायिनी संजीवनी का कार्य करती है।
राशन, शैक्षणिक सामग्री आपूर्ति एवं विद्यार्थियों के सुरक्षित आवागमन हेतु 1 स्कूल बस, 1 कैंपर, 1 पिकअप और 1 ऑटो का निरंतर उपयोग किया जाता है।
बालिकाओं के लिए पूर्ण आवासीय कन्या विद्यालय, भोजन शेड, प्रार्थना शेड एवं आधुनिक पाकशाला का निर्माण। साथ ही हलबरस व मर्दापाल में कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र संचालित।
मानचित्र: बस्तर व अबूझमाड़ में निरामय आरोग्य संस्थान के केंद्र
अबूझमाड़ और दक्षिण बस्तर का भूगोल बेहद चुनौतीपूर्ण है। यहाँ 10-25 किमी तक घने जंगलों और उफनती नदियों को पार कर हमारी टीमें बच्चों और ग्रामीणों तक पहुँचती हैं।
बस्तर के सुदूर अंचलों में हमारे कार्यकर्ताओं, बच्चों व शिक्षिकाओं के जीवंत प्रयास
आपका छोटा सा सहयोग इन मासूम बच्चों के लिए शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानजनक भविष्य का द्वार खोल सकता है।